श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.227.16 
श्रैष्ठॺं प्राप्य स्वजातीनां महाभोगाननुत्तमान्।
हृतस्वरत्नराज्यस्त्वं ब्रूहि कस्मान्न शोचसि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तूने अपने भाइयों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया था और उत्तम सुखों का अधिकारी हो गया था; परंतु अब जब तेरे रत्न और राज्य छीन लिए गए हैं, तब भी तू मुझे बता, तू शोक क्यों नहीं कर रहा है?॥16॥
 
‘You had attained the highest position among your brethren and had acquired the right to the best of pleasures; but now your jewels and kingdom have been snatched away, still tell me, why are you not grieving?॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)