श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.227.15 
शत्रुभिर्वशमानीतो हीन: स्थानादनुत्तमात्।
वैरोचने किमाश्रित्य शोचितव्ये न शोचसि॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे विरोचनपुत्र! तुम शत्रुओं के हाथ पड़ गए हो और अपने उच्च पद (राज्य) से बेदखल हो गए हो। ऐसी दयनीय दुर्दशा में पड़े हुए भी तुम किस बल से शोक नहीं करते?॥15॥
 
'Virochan's son! You have fallen into the hands of your enemies and have been ousted from your exalted position (kingdom). By what power do you not grieve even after being in such a pitiable plight?॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)