श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.227.13 
दृष्ट्वा तमविकारस्थं तिष्ठन्तं निर्भयं बलिम्।
अधिरूढो द्विपश्रेष्ठमित्युवाच शतक्रतु:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उसे निर्भय एवं अविचलित खड़ा देखकर श्रेष्ठ गजराज पर आरूढ़ शतक्रतु इन्द्र ने उससे इस प्रकार कहा-॥13॥
 
Seeing him standing fearless and unperturbed, Shatkratu Indra, mounted on the best Gajraj, said to him thus -॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)