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mahabharat 12.227.118: उस समय महर्षियों ने सम्पूर्ण चराचर जगत के स्वामी इन्द्र की स्तुति की। अग्निदेव यज्ञमण्डप में देवताओं के लिए हवि ले जाने लगे और देवेश्वर इन्द्र भी सेवकों द्वारा अर्पित अमृत का पान करने लगे। 118॥   |   mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  12.227.118 
महर्षयस्तुष्टुवुरञ्जसा च तं
वृषाकपिं सर्वचराचरेश्वरम्।
हिमापहो हव्यमुवाह चाध्वरे
तथामृतं चार्पितमीश्वरोऽपि हि॥ ११८॥
 
 
अनुवाद
उस समय महर्षियों ने सम्पूर्ण चराचर जगत के स्वामी इन्द्र की स्तुति की। अग्निदेव यज्ञमण्डप में देवताओं के लिए हवि ले जाने लगे और देवेश्वर इन्द्र भी सेवकों द्वारा अर्पित अमृत का पान करने लगे। 118॥
 
At that time the great sages praised Indra, the lord of the entire living world. Agnidev started carrying offerings to the gods in the Yagya Mandap and Deveshwar Indra also started drinking the nectar offered by the servants. 118॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)