श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  12.227.116 
अस्मत्तस्ते भयं नास्ति समयं प्रतिपालय।
सुखी भव निराबाध: स्वस्थचेता निरामय:॥ ११६॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हें हमसे कोई भय नहीं है । उचित समय की प्रतीक्षा करो और सुखपूर्वक, बिना किसी बाधा के, बिना किसी रोग के रहो ।’॥116॥
 
‘You have nothing to fear from us. Wait for the right time and live happily, without any hindrances, without any disease.'॥ 116॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)