Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.227.109: तू उस आत्मा को भजो जो हर्ष से रहित, शोक से रहित, समस्त प्राणियों के अनुकूल, शत्रुता से रहित और शान्त है ॥109॥   |   mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  12.227.109 
निष्प्रीतिं नष्टसंतापमात्मानं त्वमुपाससे।
सुहृदं सर्वभूतानां निर्वैरं शान्तमानसम्॥ १०९॥
 
 
अनुवाद
तू उस आत्मा को भजो जो हर्ष से रहित, शोक से रहित, समस्त प्राणियों के अनुकूल, शत्रुता से रहित और शान्त है ॥109॥
 
'You worship that soul which is devoid of joy, void of sorrow, friendly to all beings, free of enmity and peaceful. 109॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)