श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 103-104h
 
 
श्लोक  12.227.103-104h 
कालेनाक्रम्य लोकेऽस्मिन् पच्यमाने बलीयसा॥ १०३॥
अज्येष्ठमकनिष्ठं च क्षिप्यमाणो न बुद्धॺते।
 
 
अनुवाद
अत्यंत बलवान काल ने समस्त जगत् पर आक्रमण कर दिया है और अपनी अग्नि में सबको पका रहा है। वह यह नहीं देखता कि कौन छोटा है और कौन बड़ा। सभी को काल की अग्नि में डाला जा रहा है, फिर भी किसी को पता नहीं चलता।॥103 1/2॥
 
‘The extremely powerful Kaal has attacked the entire world and is cooking everyone in his heat. He does not see who is small and who is big. Everyone is being thrown into the fire of Kaal, yet no one becomes aware.॥ 103 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)