Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.227.101-102h: ऊँचे चढ़ने का अन्त नीचे गिरना है और जन्म का अन्त मृत्यु है। जो कुछ दिखाई देता है, वह नाशवान और अस्थिर है, इसलिए उसे निरन्तर स्मरण रखना कठिन हो जाता है।॥101 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उच्छ्राया विनिपातान्ता भावोऽभाव: स एव च॥ १०१॥
अनित्यमध्रुवं सर्वं व्यवसायो हि दुष्कर:।
अनुवाद
ऊँचे चढ़ने का अन्त नीचे गिरना है और जन्म का अन्त मृत्यु है। जो कुछ दिखाई देता है, वह नाशवान और अस्थिर है, इसलिए उसे निरन्तर स्मरण रखना कठिन हो जाता है।॥101 1/2॥
‘The end of climbing high is falling down and the end of birth is death. Whatever is visible is perishable and unstable, so it becomes difficult to remember it constantly.॥ 101 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥