श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 100-101h
 
 
श्लोक  12.227.100-101h 
नश्यन्त्यर्थास्तथा भोगा: स्थानमैश्वर्यमेव च॥ १००॥
जीवितं जीवलोकस्य कालेनागम्य नीयते।
 
 
अनुवाद
धन और सुख नष्ट हो जाते हैं। स्थान और ऐश्वर्य छिन जाते हैं और इस जीव का जीवन भी काल हर लेता है।॥ 100 1/2॥
 
‘Wealth and pleasures are destroyed. Place and prosperity are taken away and even the life of this living being is taken away by time.॥ 100 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)