Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.226.8: जगत का एक ही शासक है, दूसरा नहीं। वही शासक गर्भ में सोई हुई आत्मा पर भी शासन करता है। जैसे जल नीचे की ओर बहता है, वैसे ही उस शासक से प्रेरित जीव इच्छित दिशा में गति करता है। मैं भी उस ईश्वर की प्रेरणा के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन करता हूँ ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.226: इन्द्र और नमुचिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 226: इन्द्र और नमुचिका संवाद  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.226.8 
एक: शास्ता न द्वितीयोऽस्ति शास्ता
गर्भे शयानं पुरुषं शास्ति शास्ता।
तेनानुयुक्त: प्रवणादिवोदकं
यथा नियुक्तोऽस्मि तथा वहामि॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जगत का एक ही शासक है, दूसरा नहीं। वही शासक गर्भ में सोई हुई आत्मा पर भी शासन करता है। जैसे जल नीचे की ओर बहता है, वैसे ही उस शासक से प्रेरित जीव इच्छित दिशा में गति करता है। मैं भी उस ईश्वर की प्रेरणा के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन करता हूँ ॥8॥
 
There is only one ruler of the world, not another. The same ruler rules even the soul sleeping in the womb. Just as water flows towards the lower place, similarly the living being inspired by that ruler moves in the desired direction. I also carry out my duties according to the inspiration of that God. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)