vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 226: इन्द्र और नमुचिका संवाद
»
श्लोक 6-7h
श्लोक
12.226.6-7h
विनीय खलु तद् दु:खमागतं वैमनस्यजम्॥ ६॥
ध्यातव्यं मनसा हृद्यं कल्याणं संविजानता।
अनुवाद
अतः बुद्धिमान् पुरुष को चाहिए कि वह द्वेष के कारण प्राप्त होने वाले दुःखों को दूर करके अपने हृदय में स्थित कल्याणकारी भगवान् का चिन्तन करे । 6 1/2॥
Therefore, a wise man should get rid of the sorrows he gets due to animosity and should think about the benevolent God situated in his heart. 6 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×