श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 226: इन्द्र और नमुचिका संवाद  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.226.2 
श्रिया विहीनमासीनमक्षोभ्यमिव सागरम्।
भवाभवज्ञं भूतानामित्युवाच पुरंदर:॥ २॥
 
 
अनुवाद
एक समय की बात है, दैत्यराज नमुचि राजलक्ष्मी से वियोग में थे, फिर भी वे प्रशांत महासागर के समान शान्त थे; क्योंकि वे ही कालक्रम से होने वाले जीवों के उत्थान-पतन का तत्त्व जानने वाले थे। उस समय देवराज इन्द्र उनके पास गए और इस प्रकार बोले- 2॥
 
Once upon a time, the demon king Namuchi was separated from Raja Lakshmi, yet he remained as calm as the Pacific Ocean; Because they were the ones who knew the essence of the rise and fall of living beings that occur over time. At that time Devraj Indra went to him and said thus - 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)