यमर्थसिद्धि: परमा न मोहयेत्
तथैव काले व्यसनं न मोहयेत्।
सुखं च दु:खं च तथैव मध्यमं
निषेवते य: स धुरंधरो नर:॥ १६॥
अनुवाद
जो महान् आर्थिक उपलब्धियों के मोह में नहीं पड़ता, उसी प्रकार जो संकट के समय धैर्य और विवेक नहीं खोता तथा सुख, दुःख और बीच की अवस्थाओं को समान भाव से भोगता है, वही महान् कार्य को सँभालने वाला श्रेष्ठ पुरुष माना गया है ॥16॥
The one who does not get tempted by great economic achievements, similarly, the one who never loses patience or prudence in times of crisis and enjoys happiness, sorrow and the states in between with equal passion, he is considered to be the best person who can handle a great task. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥