Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.226.14: ऋषिगण, देवता, महादैत्य, तीनों वेदों के ज्ञाता विद्वान् पुरुष तथा वनवासी ऋषिगण - इनमें से ऐसा कौन है जिसे संसार में कोई आपत्ति नहीं होती? किन्तु जो उचित-अनुचित का विवेक रखते हैं, वे मोह या मोह में नहीं पड़ते॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.226: इन्द्र और नमुचिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 226: इन्द्र और नमुचिका संवाद  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.226.14 
ऋषींश्च देवांश्च महासुरांश्च
त्रैविद्यवृद्धांश्च वने मुनींश्च।
कान्नापदो नोपनमन्ति लोके
परावरज्ञास्तु न सम्भ्रमन्ति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
ऋषिगण, देवता, महादैत्य, तीनों वेदों के ज्ञाता विद्वान् पुरुष तथा वनवासी ऋषिगण - इनमें से ऐसा कौन है जिसे संसार में कोई आपत्ति नहीं होती? किन्तु जो उचित-अनुचित का विवेक रखते हैं, वे मोह या मोह में नहीं पड़ते॥14॥
 
Sages, gods, great demons, learned men advanced in the knowledge of the three Vedas and forest-dwelling sages - who among these do not face any objections in the world? But those who have the discretion between right and wrong do not fall into delusion or illusion. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)