Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.226.11: जिस भी गर्भ में विधाता जीव को रहने के लिए बार-बार प्रेरणा देता है, वह जीव उसी गर्भ में तो रहता है; परंतु जिस स्थान पर वह रहना चाहता है, वहाँ वह नहीं रह पाता ॥11॥ | mahabharat अध्याय 12.226: इन्द्र और नमुचिका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिस भी गर्भ में विधाता जीव को रहने के लिए बार-बार प्रेरणा देता है, वह जीव उसी गर्भ में तो रहता है; परंतु जिस स्थान पर वह रहना चाहता है, वहाँ वह नहीं रह पाता ॥11॥
In whichever womb the Creator repeatedly inspires the living being to live, that living being lives in that very womb; but in the place where it wishes to live, it is unable to live there. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥