श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.225.38 
इत्येतद् बलिना गीतमनहंकारसंज्ञितम्।
वाक्यं श्रुत्वा सहस्राक्ष: खमेवारुरुहे तदा॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
राजा बालिका के अहंकार से युक्त पूर्वोक्त वचन सुनकर सहस्त्र नेत्रों वाला इन्द्र पुनः आकाश में उड़ गया।
 
On hearing the aforesaid words of King Balika containing arrogance, the thousand-eyed Indra again flew into the sky.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि श्रीसंनिधानो नाम पञ्चविंशत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २२५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें श्रीसंनिधाननामक दो सौ पचीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)