श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.225.37 
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्तु दैत्येन्द्रो बलिरिन्द्रेण भारत।
जगाम दक्षिणामाशामुदीचीं तु पुरंदर:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - भरत! इन्द्र के ऐसा कहने पर दैत्यराज बलि दक्षिण दिशा की ओर चले गये और स्वयं इन्द्र भी उत्तर दिशा की ओर चले गये।
 
Bhishma says - Bharata! Upon Indra saying this, the demon king Bali went towards the south and Indra himself went towards the north.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)