vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा
»
श्लोक 37
श्लोक
12.225.37
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्तु दैत्येन्द्रो बलिरिन्द्रेण भारत।
जगाम दक्षिणामाशामुदीचीं तु पुरंदर:॥ ३७॥
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - भरत! इन्द्र के ऐसा कहने पर दैत्यराज बलि दक्षिण दिशा की ओर चले गये और स्वयं इन्द्र भी उत्तर दिशा की ओर चले गये।
Bhishma says - Bharata! Upon Indra saying this, the demon king Bali went towards the south and Indra himself went towards the north.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×