श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.225.32 
सर्वलोकान् यदाऽऽदित्य एकस्थस्तापयिष्यति।
तदा देवासुरे युद्धे जेताहं त्वां शतक्रतो॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
शतक्रतो! जब सूर्य एक स्थान पर अर्थात् ब्रह्मलोक में स्थित होकर नीचे के समस्त लोकों को ताप देने लगेंगे, उस समय देवासुर संग्राम में मैं तुम्हें अवश्य जीत लूँगा॥
 
'Shatakrato! When the Sun will be situated at one place i.e. Brahmalok and will start giving heat to all the worlds below, at that time I will definitely win you in the battle of Devasura*'॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)