शक्र उवाच
भूतानामिह यो वै त्वां मया विनिहितां सतीम्।
उपहन्यात् स मे धृष्यस्तथा शृण्वन्तु मे वच:॥ २९॥
अनुवाद
इन्द्र ने कहा- देवी! मेरे द्वारा स्थापित समस्त प्राणियों में से जो भी तुम्हें कष्ट देगा, उसे मैं दण्ड दूँगा। ये सभी लोग मेरी बातें सुनें।
Indra said- Goddess! Whoever causes you pain among all the creatures established by me, will be punished by me. Let all these people listen to my words.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥