श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.225.16 
शक्र उवाच
नास्ति देवमनुष्येषु सर्वभूतेषु वा पुमान्।
यस्त्वामेको विषहितुं शक्नुयात् कमलालये॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने कहा - कमलालये! क्या देवताओं, मनुष्यों अथवा समस्त प्राणियों में कोई ऐसा नहीं है जो आपका भार अकेले सहन कर सके?॥16॥
 
Indra said - Kamalalaye! Is there no person among the gods, humans or all living beings who can bear your weight alone?॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)