श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.225.10 
श्रीरुवाच
नो धाता न विधाता मां विदधाति कथंचन।
कालस्तु शक्र पर्यागान्मैनं शक्रावमन्यथा:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मी बोलीं- इन्द्र! विधाता मुझे किसी भी प्रकार किसी कार्य हेतु नियुक्त नहीं कर सकते; किन्तु मुझे काल की आज्ञा का पालन करना ही होगा। वह समय आ गया है जो मुझे बलि का परित्याग करने के लिए प्रेरित करे। इन्द्र! उस काल की अवहेलना मत करो।
 
Lakshmi said- Indra! The creator cannot appoint me to any work in any way; but I have to obey the orders of time. That time has come to inspire me to abandon Bali. Indra! Do not disregard that time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)