श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 225: इन्द्र और लक्ष्मीका संवाद, बलिको त्यागकर आयी हुई लक्ष्मीकी इन्द्रके द्वारा प्रतिष्ठा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.225.1 
भीष्म उवाच
शतक्रतुरथापश्यद् बलेर्दीप्तां महात्मन:।
स्वरूपिणीं शरीराद्धि निष्क्रामन्तीं तदा श्रियम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन! तत्पश्चात इन्द्र ने देखा कि महात्मा बलि के शरीर से अत्यन्त सुन्दर एवं तेजस्वी लक्ष्मी मूर्ति रूप में निकल रही हैं॥1॥
 
Bhishmaji says – King! Thereafter, Indra saw that the most beautiful and radiant Lakshmi was emerging from the body of Mahatma Bali in the form of an idol. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)