Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.224.6: हे प्रभु! ये सब प्राणियों के शरीर नाशवान हैं, इसलिए मैं कभी शोक नहीं करता। मुझे यह गधे का शरीर किसी पाप के कारण नहीं मिला है (मैंने इसे स्वेच्छा से स्वीकार किया है)।   |   mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.224.6 
अन्तवन्त इमे देहा भूतानां च सुराधिप।
तेन शक्र न शोचामि नापराधादिदं मम॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! ये सब प्राणियों के शरीर नाशवान हैं, इसलिए मैं कभी शोक नहीं करता। मुझे यह गधे का शरीर किसी पाप के कारण नहीं मिला है (मैंने इसे स्वेच्छा से स्वीकार किया है)।
 
O Lord! All these bodies of living beings are perishable; therefore I never grieve. I have not received this body of a donkey due to any sin (I have accepted it voluntarily).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)