Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.224.51-52: देवराज! जो समस्त प्राणियों का गंतव्य है, उस काल से मिले बिना आप कहाँ जाएँगे? मनुष्य भागकर भी उसे छोड़ नहीं सकता - उससे दूर नहीं जा सकता और न खड़े होकर भी उसके चंगुल से बच सकता है। श्रवण आदि सभी इन्द्रियाँ उस काल का अनुभव नहीं कर सकतीं, जो मास, पक्ष आदि पाँच प्रकारों में विभक्त है। इस काल के देवता को कुछ लोग अग्नि कहते हैं और कुछ लोग प्रजापति। | mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गतिं हि सर्वभूतानामगत्वा क्व गमिष्यति।
यो धावता न हातव्यस्तिष्ठन्नपि न हीयते॥ ५१॥
तमिन्द्रियाणि सर्वाणि नानुपश्यन्ति पञ्चधा।
आहुश्चैनं केचिदग्निं केचिदाहु: प्रजापतिम्॥ ५२॥
अनुवाद
देवराज! जो समस्त प्राणियों का गंतव्य है, उस काल से मिले बिना आप कहाँ जाएँगे? मनुष्य भागकर भी उसे छोड़ नहीं सकता - उससे दूर नहीं जा सकता और न खड़े होकर भी उसके चंगुल से बच सकता है। श्रवण आदि सभी इन्द्रियाँ उस काल का अनुभव नहीं कर सकतीं, जो मास, पक्ष आदि पाँच प्रकारों में विभक्त है। इस काल के देवता को कुछ लोग अग्नि कहते हैं और कुछ लोग प्रजापति।
Devraj! Where will you go without meeting time, which is the destination of all living beings? Man cannot leave it even by running away - he cannot go away from it and neither can he escape from its clutches even by standing. All the senses like hearing etc. cannot experience that time which is divided into five types like month, fortnight etc. Some people call this god of time Agni and some call him Prajapati.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥