Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.224.46: वेदवेत्ता कहते हैं कि मास और पक्ष काल के निवास (शरीर) हैं। दिन और रात उसके आवरण (वस्त्र) हैं। ऋतुएँ द्वार (मन और इन्द्रियाँ) हैं और वर्ष उसका मुख है। वह काल आयु का रूप है॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  12.224.46 
मासमासार्धवेश्मानमहोरात्राभिसंवृतम्।
ऋतुद्वारं वर्षमुखमायुर्वेदविदो जना:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
वेदवेत्ता कहते हैं कि मास और पक्ष काल के निवास (शरीर) हैं। दिन और रात उसके आवरण (वस्त्र) हैं। ऋतुएँ द्वार (मन और इन्द्रियाँ) हैं और वर्ष उसका मुख है। वह काल आयु का रूप है॥ 46॥
 
The Veda-knowers say that the month and fortnight are the abode (body) of time. Day and night are its covering (clothes). The seasons are the doors (mind and senses) and the year is its mouth. That time is the form of age.॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)