Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.224.39: परंतु यह मेरे लिए वीरता दिखाने का समय नहीं है; प्रत्युत शान्त रहने का समय है। काल ही सबको भिन्न-भिन्न अवस्थाओं में रखकर धारण करता है और काल ही सबको पकाता (नष्ट) है॥ 39॥ | mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परंतु यह मेरे लिए वीरता दिखाने का समय नहीं है; प्रत्युत शान्त रहने का समय है। काल ही सबको भिन्न-भिन्न अवस्थाओं में रखकर धारण करता है और काल ही सबको पकाता (नष्ट) है॥ 39॥
But this is not the time for me to display my valour; rather it is time to remain calm. Time itself maintains everyone by placing them in different states and time itself ripens (destroys) everyone.॥ 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥