Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.224.36: शतक्रतो! इस समय मैं इस स्थिति में हूँ और मेरे इस शरीर द्वारा जो कर्म हो रहा है, वह मेरा किया हुआ नहीं है। समृद्धि और दरिद्रता (प्रारब्ध के अनुसार) बारी-बारी से सभी को मिलती है ॥ 36॥ | mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शतक्रतो! इस समय मैं इस स्थिति में हूँ और मेरे इस शरीर द्वारा जो कर्म हो रहा है, वह मेरा किया हुआ नहीं है। समृद्धि और दरिद्रता (प्रारब्ध के अनुसार) बारी-बारी से सभी को मिलती है ॥ 36॥
Shatakrato! At this moment I am in this situation and the karma that is being performed by this body of mine is not my doing. Prosperity and poverty (according to destiny) come to everyone in turn. ॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥