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mahabharat 12.224.35: हे वज्रधारी इन्द्र! आज आप इतने समृद्ध हो गए हैं और हम लोग ऐसी स्थिति में पहुँच गए हैं, न हमने कुछ किया है और न आपने कुछ किया है॥35॥   |   mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.224.35 
नैतदस्मत्कृतं शक्र नैतच्छक्र त्वया कृतम्।
यत् त्वमेवंगतो वज्रिन् यच्चाप्येवंगता वयम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हे वज्रधारी इन्द्र! आज आप इतने समृद्ध हो गए हैं और हम लोग ऐसी स्थिति में पहुँच गए हैं, न हमने कुछ किया है और न आपने कुछ किया है॥35॥
 
O thunderbolt-wielding Indra! Today you have become so prosperous and we have reached such a state, neither we have done anything nor you have done anything. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)