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mahabharat 12.224.33: इन्द्र! नीच कुल में जन्मा हुआ, अनीति पर आधारित मूर्ख मनुष्य भी अपने मन्त्रियों के साथ सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करता हुआ दिखाई देता है। उसे भी समान रूप से यशस्वी समझना चाहिए॥ 33॥   |   mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.224.33 
दौष्कुलेयस्तथा मूढो दुर्जात: शक्र दृश्यते।
सुखं जीवन् सहामात्यो भवितव्यं हि तत् तथा॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र! नीच कुल में जन्मा हुआ, अनीति पर आधारित मूर्ख मनुष्य भी अपने मन्त्रियों के साथ सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करता हुआ दिखाई देता है। उसे भी समान रूप से यशस्वी समझना चाहिए॥ 33॥
 
Indra! A foolish man born in a low family whose birth was based on immorality is seen living a happy life with his ministers. He too should be considered equally promising.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)