श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.224.32 
दृश्यते हि कुले जातो दर्शनीय: प्रतापवान्।
दु:खं जीवन् सहामात्यो भवितव्यं हि तत् तथा॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उच्च कुल में उत्पन्न सुन्दर और तेजस्वी पुरुष अपने मन्त्रियों के साथ दुःख में जीवन व्यतीत करता हुआ देखा जाता है; ऐसी उसकी नियति थी ॥32॥
 
A handsome and glorious man born in a high family is seen spending his life in misery along with his ministers; such was his fate. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)