श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.224.31 
नाहं तदनुशोचामि नात्मभ्रंशं शचीपते।
एवं मे निश्चिता बुद्धि: शास्तुस्तिष्ठाम्यहं वशे॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे शचीपते! मुझे अपने इस पतन का किंचितमात्र भी दुःख नहीं है, मेरा मन ऐसा निश्चित है कि मैं सदैव सबके अधिष्ठाता भगवान के वश में हूँ ॥31॥
 
O Shachipate! I do not feel even a little sorrow for this downfall of mine, my mind is so sure that I am always under the control of God, the ruler of all. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)