Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.224.30: मेरे शत्रु अपने मन में द्वेष रखकर मोहित होकर मेरी शरण में आते थे और कहते थे कि 'विरोचनपुत्र बलि जिस दिशा में हैं, हम उन्हें नमस्कार करते हैं।' ॥30॥ | mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मेरे शत्रु अपने मन में द्वेष रखकर मोहित होकर मेरी शरण में आते थे और कहते थे कि 'विरोचनपुत्र बलि जिस दिशा में हैं, हम उन्हें नमस्कार करते हैं।' ॥30॥
My enemies, deluded by the hatred in their minds, used to take refuge in me saying, "We salute the direction in which Bali, the son of Virochana, is." ॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥