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mahabharat 12.224.28: तुम्हारा मन अभी भी बालक के समान है। वह आज भी वैसा ही है जैसा पहले था। हे माघवान! इसे देखो और सच्चा ज्ञान प्राप्त करो। 28।   |   mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.224.28 
कौमारमेव ते चित्तं तथैवाद्य यथा पुरा।
समवेक्षस्व मघवन् बुद्धिं विन्दस्व नैष्ठिकीम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारा मन अभी भी बालक के समान है। वह आज भी वैसा ही है जैसा पहले था। हे माघवान! इसे देखो और सच्चा ज्ञान प्राप्त करो। 28।
 
Your mind is still like that of a child. It is the same today as it was before. O Maghavan! Look at this and acquire sincere wisdom. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)