श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.224.27 
त्वमप्येवमवेक्षस्व माऽऽत्मना विस्मयं गम:।
प्रभवश्च प्रभावश्च नात्मसंस्थ: कदाचन॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तुम भी संसार को इसी दृष्टि से देखो। मन में आश्चर्य मत करो। शक्ति और प्रभाव तुम्हारे वश में नहीं हैं। ॥27॥
 
You should also look at the world with this perspective. Do not be surprised in your mind. Power and influence are not under your control. ॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)