Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.224.26: पुरन्दर! पूर्वकाल में जब मैं क्रोधित होता था, तब सारा जगत् व्याकुल हो जाता था। यह जगत् कभी बढ़ता है और कभी घटता है। यही इसका शाश्वत स्वभाव है। हे शंकर! मैं इसे भली-भाँति जानता हूँ॥ 26॥ | mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुरन्दर! पूर्वकाल में जब मैं क्रोधित होता था, तब सारा जगत् व्याकुल हो जाता था। यह जगत् कभी बढ़ता है और कभी घटता है। यही इसका शाश्वत स्वभाव है। हे शंकर! मैं इसे भली-भाँति जानता हूँ॥ 26॥
Purandar! In the past, when I was angry, the whole world used to get distressed. Sometimes this world grows and sometimes it decreases. This is its eternal nature. O Shankar! I know this very well.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥