श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.224.25 
काल: सर्वं समादत्ते काल: सर्वं प्रयच्छति।
कालेन विहितं सर्वं मा कृथा: शक्र पौरुषम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे इन्द्र! समय ही सब कुछ ग्रहण करता है, समय ही सब कुछ देता है और समय ही सब कुछ करता है; इसलिए तू अपने पुरुषार्थ पर गर्व मत कर ॥25॥
 
Indra! It is time that accepts everything, it is time that gives everything and it is time that has done everything; therefore, do not be proud of your efforts. ॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)