श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.224.24 
इच्छन्नहं विकुर्यां हि रूपाणि बहुधाऽऽत्मन:।
विभीषणानि यानीक्ष्य पलायेथास्त्वमेव मे॥ २४॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं चाहूँ तो अपने अनेक भयानक रूप प्रकट कर सकता हूँ, जिन्हें देखकर तुम स्वयं मुझसे दूर भाग जाओगे॥ 24॥
 
If I wish, I can reveal many of my terrifying forms, seeing which you yourself will run away from me.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)