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mahabharat 12.224.23: यह जानकर कि मैं गधे का रूप धारण करके इस एकाकी घर में भूसा खा रहा हूँ, तुम यहाँ आकर मेरी निन्दा कर रहे हो ॥23॥   |   mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.224.23 
तुषभक्षं तु मां ज्ञात्वा प्रविविक्तजने गृहे।
बिभ्रतं गार्दभं रूपमागत्य परिगर्हसे॥ २३॥
 
 
अनुवाद
यह जानकर कि मैं गधे का रूप धारण करके इस एकाकी घर में भूसा खा रहा हूँ, तुम यहाँ आकर मेरी निन्दा कर रहे हो ॥23॥
 
Knowing that I have taken the form of a donkey and am eating husk in this lonely house, you have come here and are criticizing me. ॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)