Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.224.22: हे शचीपते! यदि काल ने मेरी आँखों के सामने ही समस्त प्राणियों का विनाश न किया होता, तो मैं प्रसन्न होता, अपनी शक्ति पर गर्व करता और उस क्रूर काल पर क्रोधित होता॥22॥ | mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि मे पश्यत: कालो भूतानि न विनाशयेत्।
स्यान्मे हर्षश्च दर्पश्च क्रोधश्चैव शचीपते॥ २२॥
अनुवाद
हे शचीपते! यदि काल ने मेरी आँखों के सामने ही समस्त प्राणियों का विनाश न किया होता, तो मैं प्रसन्न होता, अपनी शक्ति पर गर्व करता और उस क्रूर काल पर क्रोधित होता॥22॥
O Shachipate! If time had not destroyed all living beings right before my eyes, I would have been happy, proud of my power and would have been angry at that cruel time. ॥22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥