Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.224.18-19: चाहे कोई महापंडित हो या अल्पज्ञ, बलवान हो या दुर्बल, सुन्दर हो या कुरूप, सौभाग्यशाली हो या अभागा, सभी को काल अपने तेज से ग्रस लेता है; अतः मैं, जो संसार की क्षणभंगुरता को जानने वाला बालक हूँ, जब ये सभी काल के अधीन हैं, तो मुझे क्या दुःख हो सकता है?॥18-19॥ | mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चाहे कोई महापंडित हो या अल्पज्ञ, बलवान हो या दुर्बल, सुन्दर हो या कुरूप, सौभाग्यशाली हो या अभागा, सभी को काल अपने तेज से ग्रस लेता है; अतः मैं, जो संसार की क्षणभंगुरता को जानने वाला बालक हूँ, जब ये सभी काल के अधीन हैं, तो मुझे क्या दुःख हो सकता है?॥18-19॥
Whether one is a great scholar or one with little knowledge, strong or weak, beautiful or ugly, fortunate or unfortunate, the severe time engulfs all with its brilliance; so what pain can I, a child who knows the transience of the world, suffer when all of them are subjugated by time?॥18-19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥