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mahabharat 12.224.15: हे माघवान! जो कोई किसी को मारकर या परास्त करके अपने पराक्रम का अभिमान करता है, वह वास्तव में उस पुरुषार्थ का कर्ता नहीं है; क्योंकि जगत् का रचयिता परमात्मा ही उस कर्म का भी कर्ता है। ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.224.15 
हत्वा जित्वा च मघवन् य: कश्चित् पुरुषायते।
अकर्ता ह्येव भवति कर्ता ह्येव करोति तत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे माघवान! जो कोई किसी को मारकर या परास्त करके अपने पराक्रम का अभिमान करता है, वह वास्तव में उस पुरुषार्थ का कर्ता नहीं है; क्योंकि जगत् का रचयिता परमात्मा ही उस कर्म का भी कर्ता है। ॥15॥
 
O Maghavan! Whoever takes pride in his bravery by killing or defeating someone is not actually the doer of that effort; because the creator of the world, the Supreme Soul, is the doer of that action as well. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)