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श्लोक  12.224.1 
भीष्म उवाच
पुनरेव तु तं शक्र: प्रहसन्निदमब्रवीत्।
नि:श्वसन्तं यथा नागं प्रव्याहाराय भारत॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं, 'भरत!' ऐसा कहकर इन्द्र ने सर्प के समान फुंफकारकर बलि से अपनी महानता प्रकट करने के लिए मुस्कराकर कहा।
 
Bhishma says, 'Bharata! Having said this, Indra hissed like a serpent and smilingly said to Bali to indicate his greatness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)