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mahabharat 12.223.30: पुरंदर! तुम अपनी मलिन बुद्धि के कारण मेरे सामने अपनी प्रशंसा कर रहे हो। जब तुम्हारी स्थिति भी मेरी जैसी हो जाएगी, तब तुम ऐसी बातें नहीं कह सकोगे।   |   mahabharat अध्याय 12.223: इन्द्र और बलिका संवाद—इन्द्रके आक्षेपयुक्त वचनोंका बलिके द्वारा कठोर प्रत्युत्तर   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 223: इन्द्र और बलिका संवाद—इन्द्रके आक्षेपयुक्त वचनोंका बलिके द्वारा कठोर प्रत्युत्तर  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.223.30 
त्वं तु प्राकृतया बुद्धॺा पुरन्दर विकत्थसे।
यदाहमिव भावी स्यास्तदा नैवं वदिष्यसि॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
पुरंदर! तुम अपनी मलिन बुद्धि के कारण मेरे सामने अपनी प्रशंसा कर रहे हो। जब तुम्हारी स्थिति भी मेरी जैसी हो जाएगी, तब तुम ऐसी बातें नहीं कह सकोगे।
 
Purandar! You are praising yourself in front of me because of your impure intellect. When your situation becomes like mine, then you will not be able to say such things.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि बलिवासवसंवादो नाम त्रयोविंशत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २२३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें बलि और इन्द्रका संवाद नामक दो सौ तेईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२३॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ३२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)