Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.223.29: जिनकी बुद्धि शुद्ध है और जो ज्ञान से संतुष्ट हैं, वे बुद्धिमान और क्षमाशील आत्माएँ दुःख पाकर शोक नहीं करते और समृद्धि पाकर हर्षित नहीं होते ॥29॥ | mahabharat अध्याय 12.223: इन्द्र और बलिका संवाद—इन्द्रके आक्षेपयुक्त वचनोंका बलिके द्वारा कठोर प्रत्युत्तर । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हि दु:खेषु शोचन्ते न प्रहृष्यन्ति चर्धिषु।
कृतप्रज्ञा ज्ञानतृप्ता: क्षान्ता: सन्तो मनीषिण:॥ २९॥
अनुवाद
जिनकी बुद्धि शुद्ध है और जो ज्ञान से संतुष्ट हैं, वे बुद्धिमान और क्षमाशील आत्माएँ दुःख पाकर शोक नहीं करते और समृद्धि पाकर हर्षित नहीं होते ॥29॥
Those wise and forgiving souls whose intellect is pure and who are satisfied with knowledge, do not lament when they suffer and do not become overjoyed when they achieve prosperity. ॥ 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥