Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.223.25: हे दैत्यराज! अब मुझे आपके पास न तो कोई स्वर्ण कलश, न छत्र, न पंखा दिखाई दे रहा है। न ही आपके गले में ब्रह्माजी द्वारा दी गई वह दिव्य माला दिखाई दे रही है। | mahabharat अध्याय 12.223: इन्द्र और बलिका संवाद—इन्द्रके आक्षेपयुक्त वचनोंका बलिके द्वारा कठोर प्रत्युत्तर । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न ते पश्यामि भृङ्गारं न च्छत्रं व्यजने न च।
ब्रह्मदत्तां च ते मालां न पश्याम्यसुराधिप॥ २५॥
अनुवाद
हे दैत्यराज! अब मुझे आपके पास न तो कोई स्वर्ण कलश, न छत्र, न पंखा दिखाई दे रहा है। न ही आपके गले में ब्रह्माजी द्वारा दी गई वह दिव्य माला दिखाई दे रही है।
O King of demons! Now I do not see any golden pot, umbrella or fan with you. I do not see that divine garland given by Lord Brahma around your neck.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥