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mahabharat 12.223.22-23: यज्ञ करते समय आपके यज्ञ मण्डप का विशाल मध्य स्तम्भ पूर्णतः सोने का बना हुआ था। हे राक्षसराज, जब आप निरंतर हजारों बार करोड़ों गौएँ दान करते थे, उस समय आपके मन में किस प्रकार के विचार उठते रहे होंगे?॥22-23॥   |   mahabharat अध्याय 12.223: इन्द्र और बलिका संवाद—इन्द्रके आक्षेपयुक्त वचनोंका बलिके द्वारा कठोर प्रत्युत्तर   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 223: इन्द्र और बलिका संवाद—इन्द्रके आक्षेपयुक्त वचनोंका बलिके द्वारा कठोर प्रत्युत्तर  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  12.223.22-23 
यूपस्तवासीत् सुमहान् यजत: सर्वकाञ्चन:॥ २२॥
यत्रादद: सहस्राणि अयुतानां गवां दश।
अनन्तरं सहस्रेण तदाऽऽसीद् दैत्य का मति:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
यज्ञ करते समय आपके यज्ञ मण्डप का विशाल मध्य स्तम्भ पूर्णतः सोने का बना हुआ था। हे राक्षसराज, जब आप निरंतर हजारों बार करोड़ों गौएँ दान करते थे, उस समय आपके मन में किस प्रकार के विचार उठते रहे होंगे?॥22-23॥
 
While performing the yajna, the huge central pillar of your yajna mandapam was made entirely of gold. When you used to donate tens of millions of cows continuously, thousands of times, O demon king, what kind of thoughts must have been arising in your mind at that time?॥22-23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)