Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.223.1: युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! मुझे बताइए, जो राजा राज-धन से वंचित हो गया हो और मृत्युदंड से कुचला गया हो, वह इस पृथ्वी पर कैसे विचरण कर सकता है?"   |   mahabharat अध्याय 12.223: इन्द्र और बलिका संवाद—इन्द्रके आक्षेपयुक्त वचनोंका बलिके द्वारा कठोर प्रत्युत्तर   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 223: इन्द्र और बलिका संवाद—इन्द्रके आक्षेपयुक्त वचनोंका बलिके द्वारा कठोर प्रत्युत्तर  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.223.1 
युधिष्ठिर उवाच
यथा बुद्धॺा महीपालो भ्रष्टश्रीर्विचरेन्महीम्।
कालदण्डविनिष्पिष्टस्तन्मे ब्रूहि पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! मुझे बताइए, जो राजा राज-धन से वंचित हो गया हो और मृत्युदंड से कुचला गया हो, वह इस पृथ्वी पर कैसे विचरण कर सकता है?"
 
Yudhishthira asked, "Pitamaha! Tell me, how can a King, who has been deprived of the royal wealth and has been crushed by the punishment of death, roam on this earth?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)