श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना  »  श्लोक d7
 
 
श्लोक  12.222.d7 
अनेन चापरे विप्रा: स्वभावं कर्म चापरे।
पौरुषं कर्म दैवं च यत् स्वभावादिरेव तम्॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार अन्य ब्राह्मणों में भी किसी ने प्रकृति को, किसी ने कर्म को, बहुतों ने पुरुषार्थ को, बहुतों ने प्रारब्ध को तथा बहुतों ने प्रकृति-कर्म आदि को ही जगत् का कारण माना।
 
Similarly, among the other Brahmins, some considered nature, some considered karma, many considered effort, others considered destiny and many others considered nature-karma etc. as the cause of the universe.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)