श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना  »  श्लोक d41
 
 
श्लोक  12.222.d41 
एवमेष जगत‍्सृष्टिं कुरुते मायया प्रभु:।
न जानाति विमूढात्मा कारणं चात्मनो ह्यसौ॥
 
 
अनुवाद
और यही ईश्वर अपनी माया से जगत् की रचना करता है। जिसका हृदय मोह से आवृत है, वह उस परम पुरुष को नहीं जान पाता जो उसके अस्तित्व का कारण है।
 
And this God creates the world through his Maya. One whose heart is covered with illusion does not know the Supreme Being who is the cause of his existence.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)