Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.222.d4: प्रत्येक वस्तु का सार भली-भाँति समझकर, अपनी प्रवृत्ति के अनुसार आचरण करना चाहिए। इस विषय में एक प्राचीन इतिहास प्रसिद्ध है। एक समय अनेक महर्षियों में इस विषय पर बड़ा शास्त्रार्थ हुआ था। | mahabharat अध्याय 12.222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्वेषां तत्त्वमज्ञाय यथारुचि तथा भवेत्।
अस्मिन्नर्थे पुराभूतमितिहासं पुरातनम्॥
महाविवादसंयुक्तमृषीणां भावितात्मनाम्।
अनुवाद
प्रत्येक वस्तु का सार भली-भाँति समझकर, अपनी प्रवृत्ति के अनुसार आचरण करना चाहिए। इस विषय में एक प्राचीन इतिहास प्रसिद्ध है। एक समय अनेक महर्षियों में इस विषय पर बड़ा शास्त्रार्थ हुआ था।
After understanding the essence of everything well, one should act according to one's inclination. An ancient history is famous in this matter. Once upon a time, many great sages had a great debate on this subject.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥